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विष्णु खरे के उद्धरण

अच्छा कवि मूलतः बहुत ज़िद्दी होता है, और कविता लिखते समय अपने विवेक और शक्ति के अलावा किसी और को नहीं मानता। मानना चाहता भी है तो उसका सर्जनात्मक विवेक और ऊर्जा उस पर बाज़ी मार ले जाते हैं।