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गणेश शंकर विद्यार्थी के उद्धरण

आत्मोत्सर्गरूपी सूर्य भी अपने पूर्ण तेज से तभी प्रकट होता है, जब संसाररूपी आकाश कुछ समय तक कुकर्म-रूपी काले बादलों से घिरा रह चुका हो।