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पॉलो फ़्रेरा के उद्धरण

आक्रांत मनुष्य का सामाजिक 'मैं', प्रत्येक सामाजिक 'मैं' की भाँती, सामाजिक संरचना के सामाजिक-सांस्कृतिक संबंधों में निर्मित होता है और इसीलिए उसमें आक्रांत संस्कृति का द्वैत प्रतिबिंबित होता है।

अनुवाद : रमेश उपाध्याय