आज हम क़रीब एक सदी पहले की तुलना में लगभग दोगुने समय तक ज़िंदा रहते हैं, लेकिन हम उस अतिरिक्त जीवनकाल से संतुष्ट नहीं हैं। बल्कि हम मौत के बारे में और ज़्यादा सोचने लगे हैं। अगर हम एक सौ बीस या डेढ़ सौ साल तक ज़िएँगे, तब इस बात पर कुढ़ेंगे कि हम तीन साल तक क्यों नहीं जी सकते।