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धूमिल के उद्धरण

आदमी का 'विट' और कविता में विट—दो अलग-अलग चीज़ें हैं। 'कविता में विट' उस नाथ की तरह है, जिसके जरिये बैल को एक रस्सी के सहारे, हलवाहा का नन्हा एकलौता भी खेत पहुँचा आता है।