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विनायकराव

विनायकराव के दोहे

कविगण कविता करहि जो, ज्ञानवान रस लेइ।

जन्म देइ पितु पुत्र को, पुत्रि पतिहि सुख देइ॥

नहि सरहिये स्वर्ण गिरि, जहँ तरु तरुहि रहाहि।

धन्य मलयगिरि जहँ सकल, तरु चंदन हुई जाहि॥

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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