विजयश्री तनवीर के बेला
रागदर्पण : क़िस्सागो अम्मा
एक उबाऊ शाम मोबाइल फ़ोन में उलझे हुए मैंने देखा कि फ़ोन इधर-उधर की तस्वीरों, बधाइयों और अनर्गल संदेशों से अटा पड़ा है। उन्हें डिलीट करते हुए मैंने ख़ुद को एक ज़ब्त न होने वाली झल्लाहट की गिरह में पाया।
हम ‘प्यार’ को काम समझे, वह ‘काम’ को प्यार!
नब्बे का दशक मेरे लिए रूमानी-दौर रहा। कठोर हिदायतों और ताक़ीदों के बाद भी मैं नज़र बचाकर इश्क़िया किताबों में सिर दिए रहती। पढ़ाई की किताबों में छिपाकर दम-ब-दम ‘मिल्स एंड बून’ (Mills & Boon) के रूमानी उप