noImage

रत्नावली

1520 - 1594 | कासगंज, उत्तर प्रदेश

भक्तिकाल से संबद्ध ब्रजभाषा की कवयित्री। नीति-काव्य के लिए उल्लेखनीय।

भक्तिकाल से संबद्ध ब्रजभाषा की कवयित्री। नीति-काव्य के लिए उल्लेखनीय।

रत्नावली की संपूर्ण रचनाएँ

दोहा 25

जो जाको करतब सहज, रतन करि सकै सोय।

वावा उचरत ओंठ सों, हा हा गल सों होय॥

  • शेयर

रतन दैवबस अमृत विष, विष अमिरत बनि जात।

सूधी हू उलटी परै, उलटी सूधी बात॥

  • शेयर

तरुनाई धन देह बल, बहु दोषुन आगार।

बिनु बिबेक रतनावली, पसु सम करत विचार॥

  • शेयर

भूषन रतन अनेक नग, पै सील सम कोइ।

सील जासु नैनन बसत, सो जग भूषण होइ॥

  • शेयर

स्वजन सषी सों जनि करहु, कबहूँ ऋन ब्यौहार।

ऋन सों प्रीति प्रतीत तिय, रतन होति सब छार॥

  • शेयर

"उत्तर प्रदेश" से संबंधित अन्य कवि

  • ईसुरी ईसुरी
  • पंकज चतुर्वेदी पंकज चतुर्वेदी
  • जयशंकर प्रसाद जयशंकर प्रसाद
  • केशव तिवारी केशव तिवारी
  • रहीम रहीम
  • अविनाश मिश्र अविनाश मिश्र
  • सदानंद शाही सदानंद शाही
  • रामसहाय दास रामसहाय दास
  • निर्मला गर्ग निर्मला गर्ग
  • नरेश सक्सेना नरेश सक्सेना