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जसवंत सिंह

1629 - 1678 | जोधपुर, राजस्थान

मारवाड़ के राजा और रीतिकालीन कवि आचार्य। अलंकार निरूपण ग्रंथ 'भाषा भूषण' से हिंदी-संसार में प्रतिष्ठित।

मारवाड़ के राजा और रीतिकालीन कवि आचार्य। अलंकार निरूपण ग्रंथ 'भाषा भूषण' से हिंदी-संसार में प्रतिष्ठित।

जसवंत सिंह की संपूर्ण रचनाएँ

दोहा 9

कुंभ उच्च कुच सिव बने, मुक्तमाल सिर गंग।

नखछत ससि सोहै खरो, भस्म खौरि भरि अंग॥

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मुग्धा तन त्रिबली बनी, रोमावलि के संग।

डोरी गहि बैरी मनौ, अब ही चढ़यो अनंग॥

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पिक कुहुकै चातक रटै, प्रगटै दामिनि जोत।

पिय बिन यह कारी घटा, प्यारी कैसे होत॥

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मुक्तमाल हिय स्याम कैं, देखी भावत नेन।

छबि ऐसी लागत मनौ, कालिंदी में फेन॥

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पुहमि बियोगिनि मेह की, धौरी पीरी जोत।

जरि-जरि कारी पीय बिन, मिलैं हरीरी होत॥

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पद 1

 

सवैया 6

कवित्त 15

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