दुर्गा भागवत की संपूर्ण रचनाएँ
उद्धरण 55
प्राचीन भारतीय साहित्य में सभी मानवी कामनाओं में संतति की इच्छा मुख्य है। बच्चे, पोते-पोतियों पर ही गृहस्थाश्रम का श्रेय निर्भर है। किन्तु आश्चर्य यह कि प्राचीन साहित्य के विशाल विश्व में पितामह-पोतों के प्रेम-प्रसंगों को तो छोड़ो, किसी विशिष्ट पितामह तक का उल्लेख नहीं है। भीष्म एक पितामह हैं—और वह भी सद्गुणों से बने पितामह हैं, सांसारिक परंपरा से नहीं।