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बाबुषा कोहली

1979 | कटनी, मध्य प्रदेश

इस सदी में सामने आईं हिंदी कवयित्री और गद्यकार। भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार से सम्मानित।

इस सदी में सामने आईं हिंदी कवयित्री और गद्यकार। भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार से सम्मानित।

बाबुषा कोहली का परिचय

मूल नाम : बाबुषा कोहली

जन्म : 06/02/1979 | कटनी, मध्य प्रदेश

बाबुषा कोहली का जन्म 6 फ़रवरी, 1979 को मध्यप्रदेश के कटनी में हुआ। वह बेहद कम उम्र से ही कविताएँ लिखने लगी थीं और पत्र-पत्रिकाओं में छपने भी लगीं। सोशल मीडिया पर आरंभिक लोकप्रियता के बाद भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन पुरस्कार से सम्मानित होने पर उनकी चर्चा और बढ़ी। इसी पुरस्कार के साथ फिर उनका पहला कविता-संग्रह 'प्रेम गिलहरी दिल अखरोट' भी प्रकाशित हुआ। 

अपनी कविताओं की मिठास, रहस्य, प्रेम, विमर्श, बिंबो के प्रयोग, नई कल्पनाओं आदि के लिए वह पाठकों के बीच तो लोकप्रिय रही ही हैं, गंभीर कविता पाठकों और समीक्षकों का ध्यान भी आकृष्ट किया है। कविता की नई पीढ़ी के स्त्री-स्वर में वह कुछ चिंहित शीर्ष कवयित्रियों में से एक हैं। 

उनका गद्य ‘बावन चिट्ठियाँ’ नाम से प्रकाशित हुआ है जिसे ‘कवि के गद्य’ अथवा ‘गद्य-कविता’ के रूप में पढ़ा गया है। 

बाबुषा कोहली प्रशिक्षित भारतीय कंटेंपरेरी नृत्यांगना भी हैं और अध्यापन के पेशे से संलग्न हैं। उन्होंने ‘जंतर’ और ‘उसकी चिट्ठियाँ’ नामक दो लघु फ़िल्मों का निर्माण और निर्देशन भी किया है। वह संगीत और यायावरी में विशेष रुचि रखती हैं। 

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