रायबरेली के रचनाकार

कुल: 7

युगप्रवर्तक साहित्यकार-पत्रकार। ‘सरस्वती’ पत्रिका के संपादक के रूप में हिंदी नवजागरण में महत्त्वपूर्ण योगदान।

रीतिबद्ध कवि। उपहास-काव्य के अंतर्गत आने वाले ‘भँड़ौवों’ से विख्यात हुए।

रीतिकालीन संधि कवि। सतनामी संप्रदाय से संबद्ध। जगजीवनदास के शिष्य। भाषा में भोजपुरी का पुट।

हिंदी में प्रेमाख्यान परंपरा का सूत्रपात करने वाले सूफ़ी कवि।

अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ के कवि।

रीतिकालीन कवि। काव्य-कला में निपुण। छंदशास्त्र के विशद निरूपण के लिए स्मरणीय।

'दलेलप्रकाश' के रचनाकार। भाषा ललित, मधुर और प्रवाहपूर्ण। विषय-वैविध्य से ज्ञान का प्रदर्शन करते प्रतीत होते हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल का कहना था कि 'यदि अपने ग्रंथ को इन्होंने भानमती का पिटारा न बनाया होता और एक ढंग पर चले होते तो इनकी बड़े कवियों की सी ख्याति होती।'

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