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विज्ञापन के लिए कविता

vigyapan ke liye kavita

अनुवाद : श्यौराजसिंह जैन

मिलीवौय स्लावीचैक

मिलीवौय स्लावीचैक

विज्ञापन के लिए कविता

मिलीवौय स्लावीचैक

और अधिकमिलीवौय स्लावीचैक

    बुद्धिजीवी डिग्री ली आर्ट्स फ़ैकल्टी से

    साहित्यकार 29 वर्ष का अकेला, सत्यनिष्ठ और नॉनकन्फ़र्मिस्ट

    तगड़ा मिलनसार बिस्तर है उसके पास

    और किताबों का संग्रह और एक टोकरी हस्तलिपियों की

    कॉफ़ीघर जहाज़ और भ्रमण उसे अच्छे लगते हैं

    शांतिप्रेमी और अपरिचितों से कुछ-कुछ थका हुआ

    अच्छा लगता है उसे कोई घड़ी समय के बाहर बिताना

    मित्रों का मान करता है

    गुज़रते वक़्तों में जीता है

    विश्व को अपना घर समझता है

    परंतु अभी भी उसे स्वीकार नहीं कर पा रहा

    मरे हुए, जीवित और आनेवाले सभी को भाई समझता है

    वैसे ही दंडित को

    मानवीकरण के स्वर के

    सहकारियों को

    चाहे जहाँ के हों

    सो : बना तो लिया मैंने यह विज्ञापन

    पर कौन मुझे मकान में रखेगा

    और कब

    स्रोत :
    • पुस्तक : समकालीन यूगोस्लाव कविता-1 (पृष्ठ 143)
    • संपादक : श्यौराजसिंह जैन
    • रचनाकार : मिलीवौय स्लावीचैक
    • प्रकाशन : बाहरी पब्लिकेशंस, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1978

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