वे चीज़ें, जिनसे मुझे प्रेम था, पर मुझे पता न था
ve chizen, jinse mujhe prem tha, par mujhe pata na tha
नाज़िम हिकमत
Nazim Hikmet
वे चीज़ें, जिनसे मुझे प्रेम था, पर मुझे पता न था
ve chizen, jinse mujhe prem tha, par mujhe pata na tha
Nazim Hikmet
नाज़िम हिकमत
और अधिकनाज़िम हिकमत
यह 1962 की 28 मार्च की तारीख़ है
मैं प्राग–बर्लिन ट्रेन में खिड़की के पास बैठा हूँ
रात उतर रही है
मुझे पता न था कि मुझे पसंद है
धुएँ भरे गीले मैदान पर थके पक्षी की तरह उतरती रात
हालाँकि मुझे नहीं पसंद
रात की तुलना एक थके पक्षी से करना
मुझे पता न था कि मैं करता हूँ धरती से प्रेम
जिसने कभी भूमि पर किया नहीं श्रम, क्या उसे प्रेम कर सकता है
मैंने कभी नहीं किया भूमि का श्रम
शायद यह है मेरा महज़ काल्पनिक प्रेम
मैं हमेशा नदियों से प्रेम करता रहा हूँ
चाहे वे ऐसी हो जैसी अभी दिख रही
पहाड़ियों को घेरती—यूरोपीय पहाड़ियाँ जिनके सिर पर क़िले सजे हैं
या वहाँ तक समतल फैली हुई जहाँ तक आँखें देख सकती हों
मैं जानता हूँ—एक ही नदी में एक बार भी स्नान नहीं किया जा सकता
मैं जानता हूँ—नदी नई रोशनियाँ लाएगी जिन्हें तुम कभी नहीं देख पाओगे
मैं जानता हूँ—हम घोड़े से थोड़ा अधिक जीते हैं, पर कौए जितना नहीं
मैं जानता हूँ इस बात पर मुझसे पहले भी लोगों ने विचार किया है
और मेरे बाद भी करेंगे
मैं जानता हूँ यह सब हज़ार बार कहा गया है
और मेरे बाद भी कहा जाएगा
मुझे पता न था कि मैं आकाश से प्रेम करता हूँ—
मेघाच्छन्न या स्वच्छ
वह नीला गुंबद जिसे आंद्रेई ने बोरोदीनो में पीठ के बल लेटकर देखा
जेल में मैंने ‘युद्ध और शांति’ के दोनों खंड तुर्की में अनूदित किए
मैं आवाज़ें सुनता हूँ—
आकाश से नहीं, बाहर अहाते से
जहाँ पहरेदार फिर किसी को पीट रहे हैं
मुझे पता न था कि मैं पेड़ों से प्रेम करता हूँ
मॉस्को के निकट पेरेदेल्किनो के खुले समुद्र-तट
जो मेरे पास आते हैं सर्दियों में उदात्त और विनम्र होकर
समुद्र-तट रूसी हैं, ठीक वैसे जैसे चिनार के पेड़ तुर्की हैं
‘इज़मिर के चिनार
गिरा रहे हैं अपने पत्ते...
वे पुकारते हैं मुझे ख़ंजर...
एक प्रेमी जैसे एक युवा पेड़...
मैं आलीशान इमारतों को उड़ा देता हूँ’
1920 में इल्गाज़ के जंगलों में मैंने सौभाग्य के लिए एक कढ़ाईदार रूमाल
बाँधा था देवदार की टहनी से
मुझे पता न था कि मैं करता हूँ सड़कों से प्रेम
यहाँ तक कि डामर वाली सड़कों से भी
वेरा गाड़ी चला रही है और हम मॉस्को से क्रीमिया जा रहे हैं
कोकतेबेले
जिसे पहले तुर्की में ‘गोकतेपे इली’ कहा जाता था
हम दोनों हैं एक बंद बक्से में
दुनिया दोनों ओर से बहती जाती है—दूर और मौन
मैं जीवन में कभी किसी के इतना क़रीब नहीं रहा
बोलू और गेरेदे के बीच लाल सड़क पर डाकुओं ने मुझे रोक लिया था
तब मैं अठारह का था
मेरी ज़िंदगी के अलावा गाड़ी में ऐसा कुछ नहीं था जो वे ले सकते
और अठारह में हम अपनी ज़िंदगी को सबसे कम मूल्य देते हैं
मैंने यह पहले भी कहीं लिखा है
अँधेरी कीचड़ भरी गली से गुज़रते छाया-नाटक देखने जा रहा था
रमज़ान की रात में
काग़ज़ का लालटेन रास्ता दिखा रहा था
शायद ऐसा कुछ कभी हुआ ही नहीं
शायद मैंने यह कहीं पढ़ा हो कि इस्तांबुल में रमज़ान की रात
आठ साल का कोई बच्चा अपने दादा का हाथ पकड़े छाया-नाटक देखने जा रहा है
दादा ने फ़ेज़ पहन रखा है और उनके चोग़े के ऊपर सेबल कॉलर वाला फर कोट है
और नौकर के हाथ में लालटेन है
और मैं अपनी ख़ुशी नहीं छिपा पाता
किसी कारण फिर मुझे फूल याद आते हैं
खसखस, कैक्टस, नर्गिस के फूल
कादिकॉय इस्तांबुल के नर्गिस बाग़ में मैंने मरिका को चूमा था
उसकी साँस में ताज़े बादाम की ख़ुशबू थी
तब मैं सत्रह का था
मेरा दिल झूले पर था आकाश को छूता हुआ
मुझे पता न था कि मुझे फूलों से प्रेम है
दोस्तों ने जेल में मुझे तीन लाल कार्नेशन फूल भेजे थे
अभी-अभी मुझे सितारों की याद आई है
मैं उनसे भी करता हूँ प्रेम
चाहे मैं ज़मीन पर लेटा हुआ उन्हें देखूँ
या उनके साथ उड़ान भरूँ
मेरे पास अंतरिक्ष यात्रियों के लिए कुछ सवाल हैं
क्या उन्हें सितारे और बड़े दिखे थे
क्या वे काले मख़मल पर जड़े विशाल रत्नों जैसे दिखते थे
या नारंगी पर खुबानियों जैसे
क्या उन्हें सितारों के क़रीब पहुँचकर गर्व हुआ
मैंने ‘ओगोन्योक’ पत्रिका में अंतरिक्ष की रंगीन तस्वीरें देखीं थी
नाराज़ मत होना कॉमरेड्स, लेकिन वे तस्वीरें, कहें तो, अमूर्त थीं
उनमें से कुछ पेंटिंग्स जैसी थीं—अत्यंत सजीव और ठोस
उन्हें देखकर मेरा कलेजा मुँह में आ गया
वे चीज़ों को पकड़ पाने की हमारी अनंत इच्छा हैं
उन्हें देखकर मैंने मृत्यु के बारे में भी सोचा और बिल्कुल उदास नहीं हुआ
मुझे कभी पता न था कि मुझे है ब्रह्मांड से प्रेम
मेरी आँखों के सामने बर्फ़ चमकती है
भारी, गीली, लगातार गिरती हुई बर्फ़
और सूखी उड़ती हुई बर्फ़
मुझे पता न था कि मुझे बर्फ़ पसंद है
मुझे कभी पता न था कि मुझे सूरज से प्रेम है
यहाँ तक कि तब भी जब वह अभी की तरह चेरी-लाल होकर डूबता है
इस्तांबुल में भी वह कभी-कभी पोस्टकार्ड जैसे रंगों में डूबता है
मगर तुम उसे वैसे रंगते नहीं हो
मुझे पता न था कि मुझे समुद्र से प्रेम है
(बस आज़ोव सागर को छोड़कर)
या इतना अधिक प्रेम है
मुझे पता न था कि मुझे बादलों से प्रेम है
चाहे मैं उनके नीचे हूँ या उनके ऊपर
चाहे वे दैत्य जैसे दिखें या ऊनी सफ़ेद पशुओं जैसे
चाँदनी—सबसे झूठी, सबसे शिथिल, सबसे पेटी-बुर्जुआ—मुझे खटकती है
फिर भी मुझे पसंद है
मुझे पता न था कि मुझे बारिश पसंद है
चाहे वह बारीक़ जाल की तरह गिरे या काँच पर थपेड़े मारे
मेरा दिल जाल में उलझ जाता है या किसी बूँद में क़ैद हो जाता है
और अनजाने देशों की ओर उड़ जाता है
मुझे पता न था कि मुझे है बारिश से प्रेम
लेकिन यह सब प्रेम मुझे अचानक क्यों याद आ गया जब मैं प्राग–बर्लिन ट्रेन में
खिड़की के पास बैठा हूँ
क्या इसलिए कि मैंने छठी सिगरेट जला ली है
जबकि अकेली एक ही मुझे मार सकती है
क्या इसलिए कि मैं मॉस्को में किसी के बारे में सोचते-सोचते आधा मरा हुआ हूँ
उसके बाल भूसे जैसे सुनहरे और पलकें नीली
ट्रेन घनी काली रात में धँसती चली जा रही है
मुझे पता न था कि मुझे घनी काली रात पसंद है
इंजन से चिंगारियाँ उड़ रही हैं
मुझे पता न था कि मुझे चिंगारियाँ पसंद हैं
मुझे पता न था कि मुझे इतनी सारी चीज़ों से प्रेम है
और यह जानने के लिए मुझे साठ की उम्र तक इंतज़ार करना पड़ा
प्राग–बर्लिन ट्रेन में खिड़की के पास बैठे हुए
दुनिया को यूँ ग़ायब होते देखते हुए, मानो एक वापसी-रहित यात्रा पर।
- रचनाकार : नाज़िम हिकमत
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित
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