Font by Mehr Nastaliq Web

उपन्यास लिखने की कोशिश और प्यार

upanyas likhne ki koshish aur pyaar

ज्योति शर्मा

ज्योति शर्मा

उपन्यास लिखने की कोशिश और प्यार

ज्योति शर्मा

और अधिकज्योति शर्मा

    उपन्यास लिखने की कोशिश और प्यार

    इन दिनों जब उपन्यास लिखने की कोशिश में हूँ

    प्यार मुझे परेशान किए हुए है

    अधेड़ हूँ मैं अब अधेड़ है वह

    फिर भी हम दोनों पता नहीं क्यों

    किशोरों जैसा व्यवहार कर रहे है

    अभी तो मुझे लिखना है पाँच सौ दस पन्नों का उपन्यास

    उसे करना है अस्सी करोड़ का कारोबार

    कितने काम है

    यह उमर प्यार करने की नहीं

    फ़ोन पर घँटों बात करने की नहीं

    ‘उसके बिना दुनिया घँटा है’

    यह कहने की नहीं

    इतना जबर प्यार हुआ दुनियादारी की उमर में

    जब उसकी उम्र के मर्द राममंदिर अयोध्या जा रहे है

    जब मेरी उम्र की औरतें भागवतों में नाच रही है

    हम छत पर मिलने की फ़िराक़ में रहते है

    ब्यूटीपार्लर का कहकर मैं आती हूँ

    वह धंधे का काम है कहकर

    यह जो दिमाग़ी परेशानी है जिसे प्यार कहते है

    इसका दुख उन्हें क्या पता

    जिनका वक्त ह्वाट्सऐप पर, व्यापन करते,

    रेस्तराँ में इटालियन व्यंजन खाते कटता है

    कटता है नेटफ़्लिक्स पर मर्डर मिस्ट्री देखते

    हमारा तो कटेगा समय जब इस प्यार का माँजा

    काटेगा गला किसी रोज़ पार करते सड़क

    स्रोत :
    • रचनाकार : ज्योति शर्मा
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY