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तुम भूले, मुझे याद रहा

tum bhule, mujhe yaad raha

महिमा श्रीवास्तव

महिमा श्रीवास्तव

तुम भूले, मुझे याद रहा

महिमा श्रीवास्तव

और अधिकमहिमा श्रीवास्तव

    वो बारिश का भीगा-सा मौसम,

    वो महकती शाम

    वो साँझ का झुरमुट

    वो कोयल की सुरीली तान

    वो गर्म तपती दोपहरी,

    वो सुलगते हुए अरमान

    वो ठिठुरती सर्दी,

    वो गर्म तेज़ सांसों का अलाव

    वो तुम्हारे वादे,

    वो तुम्हारी आँखो के हसीन पैग़ाम

    वो सिहरते अरमान

    वो बिछड़ने की उदास-सी शाम

    वो लौट आने की कसमें,

    वो मुझे याद रखने की बात

    वो तारीफ़ों के पुल,

    वो ख़ुशबू से भरा सफ़ेद रूमाल

    वो झील में झांकते अक्स,

    वो गीली अंधियारी रात

    वो प्यार में रखे नाम वो संग देखे गए

    नशीले ख़्वाब

    वो तुम्हारा एकाएक अजनबी-सा

    बन बेरुखी कर जाना

    वो मेरा सिसकना वो तुम्हारा

    पत्थर बन कर रह जाना

    वो टूटा दिल लिए भीगे तकिए पर

    सर रख सो जाना

    वो तुम्हारा फिर कभी ना लौट के दिल के क़रीब आना

    वो मुझे सब का सब याद रहना,

    वो तुम्हारा भूल जाना।

    स्रोत :
    • रचनाकार : महिमा श्रीवास्तव
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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