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तेहूँ चलि जइबे!

tehun chali jaibe!

प्रकाश उदय

प्रकाश उदय

तेहूँ चलि जइबे!

प्रकाश उदय

और अधिकप्रकाश उदय

    केहू बम्बई के भइया

    केहू कलकतिया

    धउरे दिल्ली हमार गँउआ बा दखल झरिया

    गइले सात समुन्दर पार

    धइले दुनिया भर के भार

    भइले मनई से, मन से ना, गिरमिटिया

    एगो जाला जो सूरतऽ

    बोलवावेला तुरत

    अपना जोड़ापारी में के दसहन सथिया

    लागल झुलनी के धक्का

    लागल बूढ़ भइले बप्पा

    लागल छतिया केकरो बजर-बतिया

    कवनो निकले गुरूप

    कइ के गाँव के सून

    पिठियवले जाला गँउओ लेले गवनइया

    एसी-फेसी चेयर कार

    ओमें फेंकरे सियार

    दूगो जनरल डाबा बा ठसमठसिया

    ओमें गँउआ खाती पीएम

    चाहे सीएम डीएम जीएम

    होला टिटिए सिपहिया के रंगदरिया

    एगो आवेला जो छुट्टी

    लेके चूरा चाउर चिट्ठी

    जाला सभकर सातू मेथी कचवनिया

    रहुए गाँवे फउदारी

    बाते-बाते गारागारी

    गइले माराफारी एके में लगत बटिया

    का दो बड़का के जात

    परी परिहथ ना हाथ

    एगो ढाबा में कोडरमा धोवेले थरिया

    गाँवे हमरा ना दाहा

    ना दशहरा तकाला

    डकमुंशी जी के जतना तकाला रहिया

    देखऽ एसों के दहार

    दहल बचलो इयार

    अब हमरे बा आवेला नमर कहिया

    गइलीं खेतवा के आरी

    ऊहो बोलल मनवा मारी—

    का रे तेहूँ चलि जइबे, बाड़े भल भइया!

    स्रोत :
    • पुस्तक : अरज-निहोरा (पृष्ठ 53)
    • रचनाकार : प्रकाश उदय
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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