Font by Mehr Nastaliq Web

सत्य के दांत नहीं होते

satya ke daant nahin hote

अमित उपमन्यु

अमित उपमन्यु

सत्य के दांत नहीं होते

अमित उपमन्यु

और अधिकअमित उपमन्यु

    सत्य कभी मरता नहीं

    विलंबित हो जाता है भीष्म की कालचयनित मृत्यु की तरह

    अबूझ हो जाता है मकड़ी के जाले की तरह

    धुँधला जाता है किसी मोतियाबिंदी आँख की तरह

    पर मरता नहीं;

    बस, एक अधमरे साँप की तरह रेंग कर

    किसी ओट में छुप जाता है

    फिर से बाहर आने को

    एक ख़ुशनुमा वक़्त पर

    अनचाही आँखों के सामने

    किसी बिसरे-पुराने प्रेमपत्र की तरह।

    सत्य कभी मरता नहीं

    सरकारें उसे दौड़ा सकती हैं थका नहीं

    पुलिस उसे कोड़े दे सकती है ज़ख़्म नहीं

    अदालतें उसे रुसवाई दे सकती हैं फाँसी नहीं

    क्यूंकि सत्य के पैर नहीं होते

    पीठ नहीं होती

    गला भी नहीं!

    सत्य की ओट में

    स्वर्ण-मृग के छलावे

    ‘अश्वत्थामा हतः’ की अति मंद ध्वनियाँ

    और विकास के मानचित्रों की अट्टालिकाएँ छुपी हो सकती हैं

    कभी इसे सुन के भी अनसुना कर दिया जाता है उस अभागन स्त्री-सा

    जिसे भोगते सब हैं स्वीकार कोई नहीं करता

    जब इसका गर्वोंमत्त गरलवमन किया जाता है

    और नहीं होता कोई महावीर नीलकंठ इसे स्वीकारने

    तो वो भटकता है कुछ क्षण के लिए धरा पर

    और फिर ऊपर उठने लगता है

    (सत्य बहुत हल्का होता है

    उसके ह्रदय में पाप नहीं होता)

    वह उठते-उठते पृथ्वी की सीमा से बाहर जा

    ब्रह्माँड में विलीन, हो जाता है

    विश्वात्मा!

    जब अंतरिक्ष यात्री जाएँगे ब्रह्माँड में

    तो वह उन्हें गूँजता सुनाई देगा वहाँ

    शब्दशः वैसा ही

    जैसा ठुकराया गया था

    बिना वायु भी

    क्यूँकि सत्य के फेंफड़े नहीं होते।

    आश्चर्य है!

    सत्य क्यों काटने दौड़ता है सबको?

    बावजूद इसके कि

    सत्य के दांत नहीं होते।

    स्रोत :
    • रचनाकार : अमित उपमन्यु
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY