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सजना के सगरा मा

sajna ke sagra ma

परवाना प्रतापगढ़ी

परवाना प्रतापगढ़ी

सजना के सगरा मा

परवाना प्रतापगढ़ी

और अधिकपरवाना प्रतापगढ़ी

    बार-बार सुधि आवै पियवा तोहार हो,

    सजन तोरे द्वारे अउबै कइके सिंगार हो,

    रतिया सपनवा मा देखली सुरतिया

    होत भिनसार नाही पावा हो मुरतिया

    दूर-दूर ढूँढ़ि आवा पावा मोहार हो

    सजन तोरे द्वारे...

    सुनी-सुनी लागत बाटै हमरी बखरिया,

    चहुँ दिसि बाजत बाटै तोहरै बँसुरिया,

    नैना का चैना नाही जिया का करार हो

    सजन तोरे द्वारे...

    जियरा मा सपनवा सजाये हम सँवरिया,

    एक दिना अउबै हम तोहरी नगरिया,

    चाहे बोर दिहा चाहे लेह्या तू उबार हो

    सजन तोरे द्वारे...

    रहिया जोहत तोहरी बीतै हो उमिरिया,

    धोबिया धोवै मोरी मैली हो चुनरिया,

    सजना के सगरा मा लेबै पखार हो,

    सजन तोरे द्वारे...

    स्रोत :
    • पुस्तक : रस गागरी (पृष्ठ 8)
    • रचनाकार : परवाना प्रतापगढ़ी
    • प्रकाशन : अभिव्यक्ति संगम, साहित्यिक संस्था, लालगंज प्रतापगढ़
    • संस्करण : 2013

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