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सजन बिन सून लागै

sajan bin soon lagai

मनोज मिश्र ‘कप्तान

मनोज मिश्र ‘कप्तान

सजन बिन सून लागै

मनोज मिश्र ‘कप्तान

और अधिकमनोज मिश्र ‘कप्तान

    सजन बिन सून लागै, सेज मोरी दइया।

    ऋतु बसंत मा कंत गये थे, सावन रहे अवैया।

    पावस कारी रात अमावस, पवन बहै पुरवैया।

    सजन बिन...

    तनघट प्यासा, मनघट प्यासा, धनघट भरे गुसैंया।

    भादौं भरे भवन मा भटकौं, जइसै भूल भुलैया।

    सजन बिन...

    परदेसी प्रीतम आये ना, पीहर से अनवैया।

    चौमासे में बरसीं अँखियाँ भरिगे ताल तलैया।

    सजन बिन...

    ना मल्हार, कजरी, ठुमरी ना, दोहा ना चौपैया।

    हे कपतान, पिया बिन नाहीं, भावै तोर सवैया।

    सजन बिन...

    स्रोत :
    • पुस्तक : अवधी मिठास (पृष्ठ 61)
    • रचनाकार : मनोज मिश्र ‘कप्तान’
    • प्रकाशन : सर्वभाषा प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2025

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