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सदी के लिए पंक्तियाँ

sadi ke liye panktiyan

अनुवाद : सरिता शर्मा

मार्क स्ट्रैंड

मार्क स्ट्रैंड

सदी के लिए पंक्तियाँ

मार्क स्ट्रैंड

और अधिकमार्क स्ट्रैंड

    जब ठंड पड़ने लगे और हवा से कोहरा गिरने लगे तो

    ख़ुद से कहो

    कि तुम आगे बढ़ते रहोगे

    वही धुन सुनते हुए चलते जाओगे

    चाहे ख़ुद को कहीं भी पाओ—

    अँधेरे के गुंबद के भीतर

    या बर्फ़ की घाटी में चंद्रमा की टकटकी की

    धवल रोशनी में।

    आज की रात जब ठंड पड़ने लगे

    तुम चलते जाओ तो

    अपने आपसे कहो जो तुम जानते हो जो

    तुम्हारी हड्डियों में गूँजती धुन के सिवाए कुछ भी नहीं है।

    और तुम एक बार

    सर्दियों के सितारों की छाँव में

    धीमी आग के पास लेट सकोगे।

    और अगर ऐसा हो जाए कि

    तुम तो आगे बढ़ते रह सको ही मुड़ पाओ तो

    तुम ख़ुद को वहाँ पाओगे जहाँ अंत है

    शरीर में बहते ठंड के अंतिम झोंके के समय

    अपने आपसे कहना

    कि तुम जैसे हो उसी रूप में ख़ुद से प्यार करते हो।

    स्रोत :
    • पुस्तक : विश्व की श्रेष्ठ कविताएँ (पृष्ठ 116)
    • रचनाकार : मार्क स्ट्रैंड
    • प्रकाशन : इंडिया टेलिंग
    • संस्करण : 2020

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