Font by Mehr Nastaliq Web

प्रेमगीत

premagit

अनुवाद : शायक आलोक

टेड ह्यूज़

टेड ह्यूज़

प्रेमगीत

टेड ह्यूज़

और अधिकटेड ह्यूज़

    यह उससे प्रेम करता था और वह इससे प्रेम करती थी

    इसके चुंबनों ने उसके पूरे अतीत और भविष्य को

    खींचकर निकाल लिया या ऐसी कोशिश की

    इसके भीतर और कोई भूख नहीं थी

    वह इसे काटती, कुतरती, चूस लेती

    वह इसे पूरी तरह अपने भीतर चाहती थी—

    सदा-सर्वदा सुरक्षित और निश्चित

    उनके सीत्कार परदों में फड़फड़ाते रहते

    उसकी आँखें कुछ भी छोड़ देना नहीं देना चाहती थी

    उसकी नज़रें इसके हाथों, कलाइयों, कुहनियों को कीलों से जड़ देती थीं

    यह उसे कसकर थामे रहता था ताकि जीवन

    उसे उस क्षण से खींच दूर ले जाए

    यह चाहता था कि सारा भविष्य वहीं रुक जाए

    यह उसे बाँहों में भरकर उस क्षण की कगार से

    शून्य में गिर पड़ना चाहता था

    या अनंत में या जो कुछ भी वहाँ हो

    उसका आलिंगन एक विशाल इस्तरी था

    अपनी हड्डियों में इसे छाप लेने के लिए

    इसकी मुस्कान किसी परीकथा के महल की अटारी थी

    जहाँ वास्तविक दुनिया कभी नहीं पहुँचती

    उसकी मुस्कान मकड़ी का विष-दंश थी

    ताकि यह तब तक निश्चल पड़ा रहे जब तक उसे फिर भूख लगे

    इसके शब्द आधिपत्य जमाते सैन्यबल थे

    उसकी हँसी किसी हत्यारे के प्रयास थी

    इसकी नज़रें प्रतिशोध की गोलियाँ थीं, ख़ंजर थीं

    इसकी सरसरी निगाहें कोनों में खड़े वे भूत थीं जो भयानक रहस्य रखते हैं

    इसकी फुसफुसाहटें कोड़े और सैनिक जूते थीं

    उसके चुंबन वकील थे—लगातार कुछ दर्ज करते हुए

    इसके स्पर्श किसी डूबे हुए व्यक्ति के आख़िरी काँटे थे

    उसके प्रेम-हुनर तालों की चरमराहट थे

    और उनकी गहरी चीख़ें फ़र्श पर रेंगती चलीं

    जैसे कोई जानवर भारी फंदा घसीटता हो

    इसके वादे शल्य-चिकित्सक का मुँहबंद थे

    उसके वादों ने इसकी खोपड़ी का ऊपरी सिरा उड़ा दिया

    वह उससे एक ब्रोच बनवाती

    इसकी क़समें उसकी सारी नसें उधेड़ लेती थीं

    इसने उसे प्रेम-गाँठ बाँधना सिखाया

    उसकी क़समें इसकी आँखों को फ़ॉर्मालिन में रख देती थीं

    अपनी गुप्त दराज़ के सबसे पीछे

    उनके चीत्कार दीवारों में धँस गए

    उनके सिर नींद में बिखर गए—

    कटे हुए खरबूजे के दो हिस्सों की तरह

    पर प्रेम को रोकना कठिन है।

    अपनी गुँथी हुई नींद में उन्होंने बाँहें और टाँगें अदल-बदल लीं

    उनके सपनों में उनके मस्तिष्क एक-दूसरे के बंधक बन गए

    सुबह उन्होंने एक-दूसरे का चेहरा ओढ़ लिया।

    स्रोत :
    • रचनाकार : टेड ह्यूज़
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY