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पिया आनै न आये

piya aanai na aaye

परवाना प्रतापगढ़ी

परवाना प्रतापगढ़ी

पिया आनै न आये

परवाना प्रतापगढ़ी

और अधिकपरवाना प्रतापगढ़ी

    दहेजवा तौ जिव कै बवाल होइ गवा,

    पिया आनै आये कइयु साल होइगवा,

    रहिया तकत मोर थकिगे नयनवा,

    ना जानी कब मोर अइहैं सजनवा,

    सारा अरमान मन कै हलाल होइगवा।

    पिया आनै आये...

    बाबू मोरे सुनि लेया हमरी अरजिया,

    बेंच के बखरिया तू दैदा मोटरिया,

    बिटिया के मुँह से सवाल होइगवा।

    पिया आनै आये...

    देखतै बदल गय दुनिया कै रितिया,

    केतना कुँवारी बाँटी बहिन अउर बिटिया,

    आँखी कै कजरवा तौ ढाल होइ गवा।

    पिया आनै आये...

    बिरहा की अगिया जरेला बदनवा,

    झरेला नयनवा से मोतिया कै दनवा,

    मनवा हमरे मलाल होइ गवा।

    पिया आनै आये...

    हे परवाना तनी माना मोरी बतिया,

    सास-ननद मोरी करैं दुरगतिया,

    लहुरा देवर जिउकै काल होइगवा।

    पिया आनै आये...

    स्रोत :
    • पुस्तक : रस गागरी (पृष्ठ 13)
    • रचनाकार : परवाना प्रतापगढ़ी
    • प्रकाशन : अभिव्यक्ति संगम, साहित्यिक संस्था, लालगंज प्रतापगढ़
    • संस्करण : 2013

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