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मीठी नींद की झपकी-सी माँ

mithi neend ki jhapki si maan

महिमा श्रीवास्तव

महिमा श्रीवास्तव

मीठी नींद की झपकी-सी माँ

महिमा श्रीवास्तव

और अधिकमहिमा श्रीवास्तव

    पहाड़ों से निकले

    फेनिल, ख़ुशी के झरने

    जैसी थी मेरी माँ।

    प्रसाद की 'कामायनी'

    सी अनूठे भाव भरी

    काव्य की सौगात

    थी मेरी माँ।

    जलतरंग-सी बजतीं

    चूड़ी भरी कलाइयाँ

    बाँसुरी-सी मीठी माँ।

    मेरी बाट निहारने वाली

    महके गुलाबों की क्यारी

    जैसी थी मेरी माँ।

    हल्की बारिश से

    नम हुई माटी की

    सौंधी ख़ुशबू-सी माँ।

    मधुमालती की बेल-सी

    मेरे मन के द्वार को

    घेरे रहती माँ।

    नींबू कैर अचार के

    मसालों से

    सने हाथों वाली

    स्वाद का संसार माँ।

    हर इच्छा को

    बिना बताए समझे

    ऐसी अंतर्यामी माँ।

    पुस्तकों पर थका

    सिर रखे ली

    मीठी नींद की झपकी

    जैसी थी माँ।

    स्रोत :
    • रचनाकार : महिमा श्रीवास्तव
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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