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मेघबाला

meghbala

अनुवाद : सुरेश सलिल

ओदीसियस एलाइतिस

और अधिकओदीसियस एलाइतिस

    एक-एक दिन करके मैं ज़िंदगी जी रही हूँ—

    कौन जानता है कि कल की हथेली पर मेरे लिए क्या होगा।

    मेरा एक हाथ नोटों को मिचोड़ता है और दूसरा उन्हें चिकनाता है।

    देखो, हमारे इस अस्त-व्यस्त समय में हथियारों को बोलना चाहिए

    और हमें अपने आपको अपने तथाकथित 'राष्ट्रीय आदर्शों' के साथ

    पंक्तिबद्ध करना चाहिए

    मेरी तरफ़ घूर-घूरकर क्यों देख रहा है, रे क़लमघिस्सू,

    जबकि तूने एक दिन के लिए भी फ़ौजी वर्दी नहीं पहनी

    दौलत खड़ी करने की कला भी सैन्य-कलाओं में से ही एक कला है

    जाओ, हज़ारों-हज़ार तिक्त कविताएँ लिखते हुए सारी रात जागते रहो जाओ,

    इंक़लाबी नारों से दीवारें रँग डालो

    अगले हरदम तुम्हें बुद्धिजीवी के बतौर देखेंगे

    सिर्फ़ मुझे, मैं जो कि अपने सपनों में तुम्हें प्यार करती हूँ,

    तुम एक क़ैदी के बतौर दिखाई देते हो

    लिहाज़ा, प्यार सचमुच अगर 'एक सम-विभाजक' है;

    जैसा वे कहते हैं,

    मैं मेघबाला हूँ और तुम, अफ़सोस, एक मरुत्।

    अंकित करो स्वयं को कहीं; जितना कर सकते हो और

    फिर उदारतापूर्वक स्वयं को मिटा दो।

    स्रोत :
    • पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 257)
    • रचनाकार : ओदीसियस एलाइतिस
    • प्रकाशन : मेधा बुक्स
    • संस्करण : 2003

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