Font by Mehr Nastaliq Web

चोट भोट के

chot bhot ke

बुद्धिनाथ झा

बुद्धिनाथ झा

चोट भोट के

बुद्धिनाथ झा

और अधिकबुद्धिनाथ झा

    राजनीति अहकल बहकल अछि।

    धोधिक हवा थोड़ेक सटकल अछि॥

    जे रोमैए सएह घोंटैए, जत्तेक होअओ घोटाला

    दैछ हवाला संविधान के सभटा हवा हवाला।

    भ्रष्टाचारक जेटा कानून, सभटा ब्रिटिश बनौलक

    ओही भास भाषाके कानून, ईहो तन्त्र अपनौलक।

    जखनहि आधारहि सलकल अछि,

    राजनीति अहकल बहकल अछि॥

    सभटा विष गीड़ि कऽ बैसल, कण्ठहु नील ने भेल

    महादेव ले भने पर्व छल, एकरा ले धुरखेल।

    कतबहु चुट्टी बिठुआ काटब, हाकरि डाक लगायब

    कान पकड़ि जाधरि नहि खैंचब, अहिना फोंका पायब।

    कानून तेकठ पर अँटकल अछि,

    राजनीति अहकल बहकल अछि॥

    बीति जाइछ सत्ताइस वर्ष तँ, सातहिँ वर्ष सजाय

    अहू बीच कहियहु नहि छोड़य, कोनहु कर्म अन्याय।

    माहिर थिके बेङ जोखबामे, अजबे राज चलाबय

    कहय 'किंग मेकर' हमहीँ छी, जहिना मोन पझाबय।

    भऽलक जीऽ ताला लटकल अछि,

    राजनीति अहकल बहकल अछि॥

    साम्प्रदायिकताक आब कहैए, रहत ने नाम-निशान

    हओ, कहिया बिनु सौहार्दे जीअल, अप्पन हिन्दुस्तान?

    लक्ष्य छैक एकहिटा, जनमे पसरि जाओ उन्माद

    भोटक फसिल फैलसँ काटत, बनल रहत आबाद।

    जनता भने भ्रमित भटकल अछि,

    राजनीति अहकल बहकल अछि॥

    चलय बसात नवल मलयानिल, कोकिल पंचम गाबय

    प्रिया विरहिणी पद छूटय जँ, पिया पलटि घर आबय।

    तहिया अपन निहारति सुमुखी, निज मुख निज कर अपना

    जन-विद्यापति तहिया आओत, गाओत देसिल बयना।

    नवल बसात लगय सिहकल अछि,

    धोधिक हवा थोड़ेक सटकल अछि॥

    राजनीति लागय पलटल अछि,

    भाथिक आगु आगि लहकल अछि।

    बहुतहु समीकरण बदलल अछि,

    लगे चोट, लोहा तबधल अछि॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : अक्षर निर्क्षर (मैथिली काव्य-संग्रह) (पृष्ठ 38)
    • रचनाकार : बुद्धिनाथ झा
    • प्रकाशन : क्रिएटिव कैम्पस प्रकाशन, हैदराबाद
    • संस्करण : 2015

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY