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लकड़ी की बेंच

lakDi ki bench

अनुवाद : राहुल झा

जेफ़री मैक’डैनियल

जेफ़री मैक’डैनियल

लकड़ी की बेंच

जेफ़री मैक’डैनियल

और अधिकजेफ़री मैक’डैनियल

    मैं एक लकड़ी की बेंच पर बैठा था

    जब छह आदमी उसे लुढ़काते हुए मेरे बग़ल से गुज़रे

    मगर वह एक लकड़ी के बक्से के अंदर थी और ढक्कन बंद था

    वह एक कंकाल बनने के रास्ते में थी

    मेरे पिता इस वक़्त निश्चित रूप से एक कंकाल हैं

    मृत्यु भ्रामक है

    क्या मेरे पिता वे हड्डियाँ हैं

    जो ओडेसा, डेलावेयर की एक पहाड़ी पर एक बॉक्स के अंदर बंद हैं?

    या वह मेरे दिमाग़ में मौजूद उस की-होल की दूसरी तरफ़ हैं

    जिससे मैं कभी-कभी बात करता हूँ?

    क्या वह एक साथ दो जगहों पर हो सकते हैं?

    क्या मुझे अनुमति है इसे बनाने के लिए,

    जिस तरह से बारह-चरणीय कार्यक्रम आपको बताते हैं

    आप भगवान बना सकते हैं?

    भगवान दरवाज़े का एक रिबन हो सकता है

    दीवार में एक कील या ताबूत में एक कील

    सुबह के 4:59 बजे हैं

    आसमान सागर की तरह नीला है।

    पक्षी पेड़ों पर पागल हो रहे

    क्या पक्षी सपने देखते हैं?

    मेरी बेटी मुझे अपने सपने बताना पसंद करती है

    ख़ासकर जब मैं कुछ बुरा करता हूँ

    एक घंटे में वह स्कूल के लिए उठ जाएगी।

    मई का महीना आधा बीत चुका है

    और इस गली के आधे पेड़ों पर कोई पत्ता नहीं है।

    क्या मुझे अपने पिता की याद आती है?

    उनकी मौजूदगी में मेरा सिर एक छाले की तरह धड़कने लगता

    और मैं उस धड़कन को रोकने के लिए

    बेतरतीब जगहों पर झपकी लेता फिरता

    हम एक-दूसरे के क़रीब थे

    जब मैं एक बच्चा था

    और जब उसने कहा कि

    वह मेरी इतिहास की किताब था

    तब वह झूठ नहीं बोल रहा था

    पक्षी सीटी बजा रहे हैं

    लेकिन वे मेरे लिए सीटी नहीं बजा रहे हैं।

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : जेफ़री मैक’डैनियल

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