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लागि कटान, कुलि बहि-बिलान

lagi katan, kuli bahi bilan

आशाराम ‘जागरथ’

आशाराम ‘जागरथ’

लागि कटान, कुलि बहि-बिलान

आशाराम ‘जागरथ’

और अधिकआशाराम ‘जागरथ’

    फेनहाँ पानी मटमइल रंग

    विकराल काल बोलै मुँहफट

    थाम्हें थम्है धारा भकोस

    उलटी-पुलटी नटई उप्पर

    बुलबुले बुल्ल बड़का बुल्ला

    सुहराय पेट हिलकोर डूब

    मँझधार पाट पानी अथाह

    चक्कर घनचक्कर भँवरकुंड

    दरिया भुखान काटै सिवान

    कुलि गुमगुड़ाम हजमी-हजमा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    गाँव के गोइँड़े सरजू माई

    करैं तांडव, बनी कसाई

    चुप्पे-चुप्पे कल्ले-कल्ले

    काटत आवैं वै हरजाई

    हरहर-हरहर बोलै धारा

    झम-झमाझम गिरै करारा

    जनम-भूमि कै नावँ-निशान

    कटि गय बहि गय मिटि गय सारा

    उच्छिन्न होय गय पूरा गाँव

    वन्नइस सौ यक्क्यासी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    घर पुस्तैनी नदिया काटै

    कुलि देखि-देखि छाती फाटै

    सनपाता सब भागैं-बिड़रैं

    केऊ केहू कै दुःख बांटै

    बीपत मूड़े भीजै सबके

    उजड़त घर दूरै से ताकैं

    वै बान्हि करेजे पै तावा

    बरतन-कुरतन लइकै भागैं

    ऊँच-नीच ना भेदभाव

    सबकै घर कटै कटानी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    खुब कटै कटान करार गिरै

    घर आँगन कै दीवार गिरै

    लागै कि चिउँटी के बिल मा

    फरूहा कुदार कै वार चलै

    टोला कै टोला उजरि गवा

    दस-बीस बोझ मा सिमिट गवा

    कोरौ बाँस थाम-थून्ही

    कुछ हाथ लगा, कुछ छूट गवा

    पहुँची पिछवारे बा नदिया

    दादा गोहराये राती मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    यक तौ कटान दुसरे बहिया

    ऊपर से पानी झमाझम्म

    घर गाँव बिलाय गवा जड़ से

    आफ़त नाचै छम छमाछम्म

    ‘पाहीमाफी’ छितराय गवा

    पूरुब बगिया मा आय गवा

    जेकरे जमीन यक्कौ धुर ना

    गाँव छोड़ि बिलगाय गवा

    पांड़े बोले मड़ई धइ ल्या

    नीबी के बगल जमीनी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    सरजू मा जब घर-गाँव कटा

    कटिकै बहिगै नरिया-खपड़ा

    बखरी-कुरिया कै भेद मिटा

    सबके टाटी सबके छपरा

    देखै मा सब यक्कै घाटे

    पर जाति कै बीज रहै बिखरा

    जब बाढ़ आय तब काव करैं

    गंधाउर पानी रहै भरा

    पानी रस्ता रस्ता म् पानी

    बाहर पानी पानी घर मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    ईंटा खपड़ा नरिया लकड़ी

    बड़वरकन के बड़की बखरी

    बरियान रहे जे गुमान करैं

    लइकै भागैं बटुला-बटुली

    जे चलत रहीं अइँठी-अइँठी

    लरिका दुपकाय रहीं बइठी

    छोटवरकै खीस निपोर दियैं

    जब कहैं कि ना आवा अइसी

    उकडूँ बइठी नइकी दुलहिन

    किसमत काँ कोसै घूँघुट मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    नित-क्रिया कै कठिन समिस्या,

    सब पानी मा सुबहोसाम करैं

    सरियारिग लरिके चला जायँ

    पेड़े ऊपर मैदान करैं

    छपरा कै लकड़ी खींच-खाँच

    माई ईंधन चीरैं-फारैं

    पटरा बिछाय खटिया उप्पर

    ईंटा धइ कै चूल्हा बारैं

    पानी लावै काँ कहाँ जाय

    जब कूआँ बूड़ा बाढ़ी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    पानी घटि गय जब बहिया कै

    चिपचिपा नमी बाहर भित्तर

    सूखै जइसै तनिकौ कीचर

    पानी बरसै वकरे उप्पर

    सर्दी-खाँसी तौ आम बात

    जूड़ी-बोखार कै ताप बढ़ा

    घर-घर मा लोग बेमार मिलैं

    खटिया लइकै सब रहैं पड़ा

    कुछ घूमैं झोरा-छाप डाक्टर

    लिहें दवाई झोरा मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    अब काव कही केतना गाई

    खोपरी फोरिबा हमरी ताईं

    बाढ़ी से बरपा कहर रहै

    टी० बी० जोरान खाँसैं माई

    बिखरा-बिखरा साजो-समान

    मुँहफटा चिढ़ावै आनबान

    माई कै खोंखी जोर किहिस

    खँसतै-खाँसत निकरा परान

    दुःख-दर्द दूरि भय छोट-मोट

    कोहराम मचा पूरे घर मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    पइरा झुरान पइदा पइया

    सरजू भुखान मरियल गइया

    निथरै घटान जल घटै पेट

    उथले जलरेत धँसी नइया

    घुटनाहलान बस आर-पार

    कोसन लामे दुइनौ कगार

    चढ़ि नदी-पाट हाथी कचरैं

    कूकुर बिलार लोखरी सियार

    चउवा-चाँगर चौगड़ा चरैं

    चरवाहे मस्त कबड्डी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    दरियाव जाड़ मा सूनसान

    छीछिल ऊथल रेती उतान

    गाँठी गटई फिरु छाती तक

    बस येक हाथ नेकुनाबुड़ान

    निरमल जल छपछप् छप्प-छप्प

    नइया की नीचे थप्प-थप्प

    लहकारा पुरुवाई पाये

    दीवार बजावै धप्प-धप्प

    सुरसुरी बयरिया माघ-पूस

    झुरझुरी मनावै फागुन मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    जिनके धन-दौलत ना खेत

    वै का जानैं देश-विदेश

    गाँव-गाँव मा करैं मजूरी

    वनकै तौ गाँवै ‘परदेस’

    धरती माई बनिन विमाता

    फेर लिहिन मुँह ‘भारत माता’

    नदी कटिगै ठौर-ठिकाना

    टूटा जनमभूमि से नाता

    भागैं जेस पलिहर कै बानर

    माझा’म केऊ डाड़े मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    रोवनी सूरत बहि-बहि रोवै

    तब्बौ ना चुकत आँस बाटै

    जेतना सपरा सब कहि डारेन

    यतना कहकुत बहुतय बाटै

    का खाली-खाली नीक कही

    सबही के मन कै बात कही

    दुःख-दर्द सभी केव् मनई कै

    यक ठू किताब मा छाप कही

    पाहीमाफी कै लिखा पढ़ौ

    औ’ सोच-बिचार करौ मन मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    पोर-पोर पाती दर पाती

    खरी बात लागै जेस लाठी

    करै रोज़ बखरी दुवार जे

    केसस मिताई वोसे गाँठी

    बाँटौ लिखि-लिखि बाँचौ पाती

    हक़-हुकूक बिन माँगे माफी

    काटे कटै जिनगी जबजब

    रोज पढ़ै ‘पाहीमाफी’

    आह सरापै जाय फुराय

    पेटवा जरै गरीबी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    हुचहुच हिचकी खोंखों खाँसी

    बैदा जनमभूमि कै माटी

    फुनगी तीत नीम कै तूरौ

    कूँचौ रस तुलसी कै पाती

    जुगे-जुगे काजी लफ्फाजी

    सँपरा जवन बना नाकाफी

    देस जवारी घर समाज पै

    झीन भरे’कै ‘पाहीमाफी’

    बतिया मोर तीत फल-बतिया

    मीठ समइ’या कोखी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    स्रोत :
    • पुस्तक : पाहीमाफी (पृष्ठ 335)
    • रचनाकार : आशाराम ‘जागरथ’
    • प्रकाशन : रश्मि प्रकाशन, लखनऊ
    • संस्करण : 2021

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