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खरिहान के मसान जनि करऽ

kharihan ke masan jani karऽ

प्रकाश उदय

प्रकाश उदय

खरिहान के मसान जनि करऽ

प्रकाश उदय

और अधिकप्रकाश उदय

    (ई कविता किसान-जीवन के महागाथा 'गोदान' के पात्रन के

    अलोता)

    रामजी

    होरी के घर में

    सोना-रूपा के देलऽ जोड़ी

    सुनऽ

    बात बूझऽ

    उन्हनी के सेवान जनि कर

    खेलेवाड़ जनि करऽ

    खेले द, धूर में, माटी में

    चमके चमचम

    एह दलिदरई के घाटी में!

    बडकी गोंइठा पाथी

    छोटकी रोदन पसारी

    गोबर साने खाती

    कहियो गाय जे आई दुआरी!

    सोनवा के बात मानी

    तब नू मथुरा

    सिलिया अँटक ना जाई

    तब नू मथुरा

    ना सोना रसरी के फँसरी

    ना होरी सूद के चकरी!

    भरल जवानी में

    बुढ़िया बना देलऽ रूपा के

    ईजत बेंचवा देलऽ धनिया के

    जरिको ना डर तहरा

    दुनिया के छिया-छिया के?

    खरिहान के मसान जनि करऽ

    सोना के माटी जनि करऽ

    रूपा के भसान जनि करऽ

    हतिए गो रहे उन्हनी के

    सेयान जनि करऽ

    जवान जनि करऽ

    सीता जी माफ ना करिहें

    देखऽ राम जी

    अइसन पाप जनि करऽ!

    स्रोत :
    • पुस्तक : बेटी मरे त मरे कुँआर [भोजपुरी कविता-संग्रह] (पृष्ठ 71)
    • रचनाकार : प्रकाश उदय
    • प्रकाशन : कौशल्या प्रकाशन, आरा
    • संस्करण : 1988

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