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केहू के जरइ जियरा

kehu ke jarai jiyra

नरेन्द्र कुमार

नरेन्द्र कुमार

केहू के जरइ जियरा

नरेन्द्र कुमार

और अधिकनरेन्द्र कुमार

    फागुन महिनवाँ के मधुरी बयार बहइ

    झूमि-झूमि आम बउरान।

    केहू के जरइ जियरा केहू के जुड़ान॥

    ओनके सिवनवाँ में लहकइ गेहुँववाँ हलरे बखरवा मा धान।

    हमरे करेजवा में भूख के सापिनी डसे रहि-रहि निकरे परान।

    बाबू के हबेलिया में गमके फूलारि जामें,

    रंगरेली साँझ बिहान॥ केहू के...

    होइ हो लहारी मचइ खुसहाली होइ रोज फगुनी बहार।

    गलियन हमरे उपास परइ मितवा रोइ बीतइ साँझ भिनसार॥

    बाबू के बगियवा में कुहुके कोइलिया

    गूँजे मुरैला के बान॥ केहू के....

    हमरे होरिल हरवाह-चरवाह बनइँ मलिका के राजकुमार।

    ओई भगवान अहें कलयू के देवता गाउँ के हमरे ज़मीदार |

    हमरी झोपरिया में पसरे करजवा

    भये पुरखाती गुलाम॥ केहू के....

    जोरि के बियाजु लेइँ ब्याजु के छियाजु लेइँ उपरा से देइँ कोरा चारि।

    मेहनत मजुरिया मा लूटि-लूटि खाइँ तबउ देखइँ टेढ़ अंखिया निहारि॥

    हमरी जवानी जब लेई अंगड़ायी तब

    सुरजू बिखेरी मुसकान केहू के...

    बाटइ अन्हियारी तव्बउ लोहिया लगत बाटइ—

    दिसवा पुरुव बा ललानि।

    देसवा मा कोने-कोने सुरू बाटे जंगवा

    जागि गवा मजुरा—किसान

    हाथ औजार लेके पूँजिया के किला खनबो—

    तब होये हमरो विहान॥ केहू...।

    11.08.1983

    स्रोत :
    • पुस्तक : अब होगी बरसात (पृष्ठ 65)
    • रचनाकार : नरेन्द्र कुमार
    • प्रकाशन : जन संस्कृति प्रकाशन
    • संस्करण : 1990

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