Font by Mehr Nastaliq Web

कतना बदल गइल बा गाँव

katna badal gail ba gaanv

ब्रजभूषण मिश्र

ब्रजभूषण मिश्र

कतना बदल गइल बा गाँव

ब्रजभूषण मिश्र

और अधिकब्रजभूषण मिश्र

    कहाँ गइल संगीत

    जाँत के,

    मूसर के, ढेंकी के ?

    अब गाँवन में

    'फ्लावर मील' के

    गूँजत बा आवाज।

    कहाँ सुनाता कतहूँ—

    टिटकारल बैलन के,

    हरवाहन के ललकार;

    अब गाँवन में

    'ट्रैक्टर' भइया!

    धूर उड़ावत जात।

    अब गाँवन में

    बाजत बाटे

    'ट्रांजिस्टर' पर गीत,

    आल्हा-लोरिकायन,

    झूमर सोहर,

    फगुआ-चैता-बारहमासा

    सभे रहल बा भूल;

    'फिल्मी' धुन पर

    गीत बियाह के

    गावल जाता।

    भुला गइल

    घंटी के टुन-टुन

    घर लवटत बैलन के,

    अब सांझी खा

    गाँव-गाँव में

    फूटत बाटे बम,

    ठाँय-ठाँय गूँजत बा सगरो

    'राइफल के आवाज।

    बदल गइल बा केतना देख!

    अब के गँवई मन,

    परा गइल कहँवा?

    बुझाय ना

    लोग के भोलापन,

    बढ़ गइल बा—

    गाँव-गाँव के

    पंचन में प्रपंच;

    बदल रहल बा—

    सभे पैंतरा,

    लगा रहल बा दाँव,

    कतना बदल गइल बा गाँव!

    कतना बदल गइल बा गाँव!!

    स्रोत :
    • पुस्तक : खरकत जमीन बजरत आसमान (पृष्ठ 60)
    • रचनाकार : ब्रजभूषण मिश्र
    • प्रकाशन : वनांचल प्रकाशन, तेनुघाट (बोकारो)
    • संस्करण : 2015

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY