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कह आओ

kah aao

अनुवाद : सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज

सीमस हीनी

और अधिकसीमस हीनी

    अब जाओ, भूत की तरह दौड़ कर भागो बरख़ुरदार!

    कह आओ अपनी माँ को

    ख़ुशी का एक बगूला उड़ा दें

    कि मेरे मन में हुलास भरने को—

    और मेरी इस टाई की गाँठ बाँध दें।

    लेकिन मालूम है मुझे वह अब भी ख़ुश थे

    जब मैं अपनी जगह से हिला नहीं तो

    झेल गए

    वह मुस्कान जिसने मात दे दी थी

    उनकी मुस्कुराहट को

    और उनके बेतुके काम को

    शायद अब वह अगली चाल का इंतज़ार कर रहे थे।

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : सीमस हीनी

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