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राष्ट्र गीत

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आरसी प्रसाद सिंह

आरसी प्रसाद सिंह

राष्ट्र गीत

आरसी प्रसाद सिंह

और अधिकआरसी प्रसाद सिंह

    देश तोँ की आइ शुचि, सुन्दर लगै छह!

    आइ आङनमे मिलन-मेला जगै छह!

    राजपथपर लहरि, लोकक भीड़ उमड़ल।

    गगनमे हर्ष-पुष्पक मेघ घुमड़ल!

    आइ पाबनि, पर्व पुण्यक, मुक्ति-गंगा;

    आइ पुलकित प्राण, लोकक मोन चंगा;

    आइ जे विजयी ध्वजा फहरा रहल छह!

    आइ जे आनन्द धारामे बहल छह!

    आइ जे उत्सव-मधुर वितरण करै छह!

    आइ जे सबहिक हृदयमे रस भरै छह!

    से कहह की देश तो सरिपहुँ हमर छह?

    सत्य की इतिहासमे तोँ ही अमर छह?

    कीर्ति तोरे स्वर्ण-अक्षरमे लिखल छह?

    पयर की तोरे मुकुट स्वर्गक पड़ल छह?

    की किरणसँ भेल चोन्हर आँखि हमरे?

    की कटल अछि मन-विहंगक पाँखि हमरे।

    की सनातन सत्य हमरा नहि सुझै अछि?

    की हमर परिवेश हमरे नहि बुझै अछि?

    देश हमरे आइ चीन्है अछि हमरा।

    भेल अछि अनजान फूलक लेल भमरा।

    विपत्तिक बात, ककरा के सुनाबय?

    मोनमे सन्ताप, बाहर गीत गाबय!

    विरोधाभास जीवनमे भरल अछि!

    शंख की बाजय जखन कण्ठे भरल अछि।

    आइ ने हे देश, तैयो हम नुकायब!

    आइ ने कहुना नयनसँ नोर ढारब!

    पेटमे हम बान्हि पाथर आबि जयबह!

    गीत स्वागतकेर तोहर गाबि जयबह!

    हे स्वदेशक मीत, तोहर जीतमे हम

    हारि अपनो बिसरि देबह संग निर्मम!

    आइ जे हम एक छी, हम एक देशक

    एक आत्मा छी अमर, चर्च क्लेशक!

    आइ ने क्यो नीच, ने क्यो रंक-भूखल!

    रहय ककरो दुख न, ककरो मुँह सूखल!

    स्रोत :
    • पुस्तक : सूर्यमुखी (पृष्ठ 27)
    • रचनाकार : आरसी प्रसाद सिंह
    • प्रकाशन : मैथिली अकादमी, पटना
    • संस्करण : 2011

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