Font by Mehr Nastaliq Web

हम कहलियै मुदा ओ सुनलकै कहाँ

hum kahaliyai muda o sunalakai kahan

आनन्द मोहन झा

आनन्द मोहन झा

हम कहलियै मुदा ओ सुनलकै कहाँ

आनन्द मोहन झा

और अधिकआनन्द मोहन झा

    हम कहलियै मुदा सुनलकै कहाँ

    हमरा मोनक व्यथा बुझलकै कहाँ!

    क्यो जखन नहि रहै, हम सहोदर रही

    मान संबंधक रखलकै कहाँ!

    हीत-परहित, अपन-आन किछु नहि बुझै

    किछु बुझा दीतियै, पुछलकै कहाँ!

    आँखिमे स्वप्न नेने चलल फूल सन

    बाटमे काँट छै से देखलकै कहाँ!

    बात किछु नहि रहै, कतय ल' गेलै

    हाथ किछु नहि एतै से सोचलकै कहाँ!

    सभ सवालक जवाब भेटि जेतै मुदा

    आँखिमे छल लिखल, पढ़लकै कहाँ!

    लिखि-लिखिकेँ कवित मोट पोथी कएल

    मोनकेँ जे छुबै से लिखलकै कहाँ!

    स्रोत :
    • पुस्तक : तेँ ओ बजलैए (पृष्ठ 104)
    • रचनाकार : आनन्द मोहन झा
    • प्रकाशन : नवारम्भ, मधुबनी/पटना
    • संस्करण : 2023

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY