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हियरा के कोना

hiyra ke kona

अनीता साह

अनीता साह

हियरा के कोना

अनीता साह

और अधिकअनीता साह

    हियरा को कोना तूड़ेला, हित-परीत के ताना।

    कइसन झंझट झाल बखेरा, जिनगी गजबे गाना॥

    याद करब जे याद करी ऊ, अदला-बदली बाटे।

    दुखवा से कवनो मतलब ना, नेह बिकेला हाटे॥

    रहीं लगावत दिनभर अर्जी, पर ना आसन डोली।

    काम बहुत बा व्यस्त रहेनीं, ईहे निकली बोली॥

    दोसर के बतिया नीमन बा, बात हमर मिरचैया।

    करीं निहोरा तबो सुने ना, हाल गजब बा दैया॥

    दोसर के अँगना बा भावत, द्वार हमर बेगाना।

    दिन बीतेला एने ओने, हमरे ला अनजाना॥

    हर रिश्ता में मतलब बाटे, राउर प्रेम जरेला।

    कतनो करके मरि जाइब पर, दुखवा कौन बुझेला॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : गुजर रहल बा जिन्दगी (कविता-संग्रह) (पृष्ठ 49)
    • रचनाकार : अनीता साह
    • प्रकाशन : ओरिएन्टल पब्लिकेशन हाउस प्रा. लि., काठमांडू, नेपाल
    • संस्करण : 2025

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