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हलकू भइया

halku bhaiya

मोहनलाल यादव

मोहनलाल यादव

हलकू भइया

मोहनलाल यादव

और अधिकमोहनलाल यादव

    हलकू भइया, हलकू भइया

    लुटि गइलीं तोहरी पुरवइया।

    झूठै कहैं बजट हितकारी

    बिका भाइ कुल लोटा-थारी,

    बिजली महँगी डीजल महँगा

    खाद-बीज सब महँगै महँगा।

    फिर फिर झूठे करें मुनांदी

    दुगुनी होइहैं तोरी कमइया,

    हलकू भइया, हलकू भइया।

    चाहे जेतना जतन लगावा

    चाहे जेतना जान लड़ावा,

    दिन भर करौ खेत रखवाली

    काटि पउब्या एकौ बाली।

    चरि जइहैं जोगी की गइया

    हलकू भइया हलकू भइया।

    तोहरे हिस्से में बर्बादी

    पूँजीपतियन कटिहैं चाँदी,

    गरज पड़े आँसू टपकइहैं

    कुर्सी पउतै खुब लतिअइहैं।

    राष्ट्रवाद के देइँ दुहइया

    हलकू भइया, हलकू भइया।

    बाँस के कोठी बाँसइ होई

    अब तौ सत्यानासै होई,

    लड़े बिना कल्यान होई

    हरियर खेत-सिवान होई।

    इंकलाब की लड़ौ लड़इया

    हलकू भइया, हलकू भइया।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 36)
    • रचनाकार : मोहनलाल यादव
    • प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2023

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