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हाँ, मैं तुम्हें खो चुकी हूँ

haan, main tumhein kho chuki hoon

अनुवाद : रीनू तलवाड़

एडना सेंट विंसेंट मिले

एडना सेंट विंसेंट मिले

हाँ, मैं तुम्हें खो चुकी हूँ

एडना सेंट विंसेंट मिले

और अधिकएडना सेंट विंसेंट मिले

    हाँ, मैं तुम्हें खो चुकी हूँ; और सीधी तरह खो चुकी हूँ

    अपने तरीक़े से, और अपनी पूरी सहमति से।

    तुम जो चाहो कहो, अपनी बग्घियों में बादशाहों ने भी शायद ही

    लगाया हो गले अपनी मौत को इससे निडर तरीक़े से

    मानती हूँ,

    थी कुछ रातों की अकुलाई और गर्म रुलाई,

    लेकिन यह मुझे स्वीकार था,

    दिन ने पोंछे मेरे आँसू, ऐसी नहीं थी मैं कि रख लेती

    रगड़ खाते उन पंखों को पिंजड़े में

    हो सकते थे जो आज़ाद।

    अगर किया होता मैंने तुमसे कम प्यार, दिया होता धोखा

    शायद रोक लेती तुम्हें एक वसंत और

    मगर उन शब्दों की क़ीमत पर जो हैं मेरे लिए अनमोल

    और वैसा कोई वसंत होता भी नहीं जैसा बीता था

    जी लूँ अगर इस वेदना को—जैसे ख़ूब जीते हैं मर्द—

    तुम्हारे बारे में कहने को केवल अच्छा ही होगा मेरे पास।

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : एडना सेंट विन्सेंट मिले

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