एकटा बरखी-साँझ: दूटा कविता
ekta barkhi sanjhah duta kavita
(पहिल)
सूर्ज डूमि गेलैक
गोधूलिक ट्वाइलाइट भरमा नहि सकैत अछि
हम जनैत छी आब हेतैक एक पक्कड़ राति
अन्हारक बादूर पाँखि पसारने जाइत छैक
दूर, आर दूर
एहनमे रोज पुरबा सिहकैत छैक
आ एकटा असोथकित स्वास
देहकेँ सिहरा-सिहरा जाइत अछि
आ खिड़की बन्न भए जाइत छैक—निमुआन
तँ कतहु कोनो कुण्डलिनीक केंद्रमे
भगजोगिनी भुकभुकाइत छैक
मुदा अन्हारक परिधिपर किरिणक क्षीण ताग
टूटि-टूटि जाइत छैक
आ घमि-घमिकऽ एकटा स्वेद गंध
पाँजकेँ भिजा-भिजा जाइत अछि
हम अपन नेनपनकेँ चिन्हैत छी
मुदा नेन्ना कहियो रही से मोन नहि अछि
यौवन मुक्त अछि कि नहि से बोध नहि अछि
पाछू घूमबाक कि देखबाक प्रश्न नहि
...ओइ डू नॉट होप टू टर्न एगेन...
...बिकौज आइ डू नॉट होप टू टर्न...
सभ किछु अन्हारमे डूमि गेलैक अछि
मुदा अगिला उद्भासित भए उठलैक अछि
साँझ-किरिणक उमड़ैत अनंत विस्तारमे
आ हम छी जे
आगाँ हेतैक एक तोड़ राति
आ तुरक फाहा सनक हल्लुक, निर्गन्ध, सर्दबर्फ
यूकिलिप्टसक ठहुरीकेँ झुका देतैक
(दोसर)
एना होइत तँ नहि छैक
आ-जे यदि कदाच् भए जइतैक
तँ—एक भ्रमसँ दोसर भ्रम दूर करबाक
अहाँक भ्रम दूर भए जइतए
पानियोपर लीखल गीत
मेटौने ने मेटाइत छैक
जखन चकभाउर दैत प्रवाह
हठात जमि जाइत छैक
पुबरिया खिड़की बाटे
फुफकार कटिते छैक बसात
दाड़िम फलाइते छैक
भकरार भए कऽ लाले-लाल
बरेड़ी परक खौंतामे बगड़बी फेर
अंडा पारलकैक अछि
आ हमरा अहाँक कहल शीत-बसंतक खिस्सा
निरंतर रेतैत रहिते अछि
आँगनमे ओहिना इजोरिया उधियाइत छैके
हमरा बोहियाइक मोन होइते अछि (सत्ते)
मुदा एना होइते ने छैक
होइतैक तँ अहाँ देखितिऐक
जे कोना रस्ताक कातमे
पजेबाक सोङरपर अटकल बस
आस्ते-आस्ते झहरैत छैक, भहरैत छैक
सभ किछु ओहिना छैक
ओहिना सभ खाइत अछि
पीबैत अछि, सुतैत अछि
जगैत अछि, हँसैत अछि
कनैत अछि, घृणा करैत अछि
प्रेम करैत अछि आ एहिनामे
बेराबेरी जमल समयसँ
मासो सभ चुबिते छैक-फागुनो-सओनो-कातिको
ओहिना एकदम ओहिना जेना सभ किछु
ठहरि गेलैक अछि, जड़ भए गेलैक अछि
हम जनैत छी एना नहि होइत छैक
मुदा एकबेर होइतैक तँ फेरो ओना नहि होइतैक
कारण एक भ्रमसँ दोसर भ्रम दूर करबाक
अहाँक भ्रम दूर भए जइतए
आ एनामे तँ दुनू भ्रमे थीक
इहो आ ओहो।
- संपादक : बालमुकुन्द
- रचनाकार : धूमकेतु
- प्रकाशन : ई-मिथिला
- संस्करण : 2018
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.