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एक गीत और तीन प्रश्न

ek geet aur teen parashn

अनुवाद : शायक आलोक

अमजद नासिर

अमजद नासिर

एक गीत और तीन प्रश्न

अमजद नासिर

और अधिकअमजद नासिर

    एक

    बातचीत चाँदी है

    कविता सोना है

    और स्त्रियाँ इन दोनों धातुओं की गूँज हैं

    कविताएँ

    अब से हमारी गीत होंगी

    तो फिर शुरू करें—

    बिना उधार लिए, बिना सजावट के

    और हमारे बीच मौजूद जीवित चीज़ों को देखें

    प्रशंसा की दृष्टि से

    गीत हमारे संतोष का उत्सव मनाए

    और उन सुखों का जिन्हें केवल चरवाहे जानते हैं—

    जिनके गीत और उनकी बगलों की गंध

    बकरियों की पगडंडियों

    और झाड़ीदार घासों में फैल गई है

    और जो गुम हो गए हैं फिर कभी नहीं लौटने के लिए।

    दो

    क्या हम चाँदी की तुरही में फूँक मारें?

    लेकिन चरवाहे गीतों के बिना कैसे जिएँ

    अपनी भेड़ों के बिना और इच्छाओं के बिना?

    नहीं, हम गाएँगे

    घोड़ों और वायलिन के बिना चरवाहे कैसे हो सकते हैं

    और उन घावों के बिना जो कभी भरते नहीं?

    तीन

    बातचीत चाँदी है

    कविता सोना है

    और स्त्रियाँ इन दोनों धातुओं की गूँज हैं

    अब से कविता ही हमारे गीत होंगी

    आओ इन्हें समर्पित करें—

    उनको जो कभी वापस नहीं आएँगे,

    चितकबरी भोरों के चरवाहों को

    विवाह-वस्त्रों में सजे उच्चारों को

    उन स्त्रियों को जिन्होंने सबसे उग्र हिरणों से प्रेम किया

    और जिन्होंने ताँबे के इरोस को चुना—

    वसंत की घासों को, ज़मीन में गहरे दबे कुओं को

    बाज़ों को, रात्रि-भक्षियों को, अरब के बाघ को

    झाँझों को, संगीनों को, छोटी नावों और काठियों को

    जो क़बीलों के रक्त से जड़े हैं

    उन युवकों की पुकारों को जिन्हें अभी सीखना है

    अपनी घोड़ियों को साधना

    और खुले इलाक़ों से पूरे क़बीलों के पलायन को—

    लोहे की लगामों को ज़ोर से खींचते हुए

    और इससे भी आगे—

    टूटी हुई बाँसुरियाँ

    और खोखली हड्डियाँ

    हमें तीन प्रश्नों से चकित करेंगी :

    कितना समय बीत चुका है?

    क्या पुराने घाव भर गए हैं?

    कौन-से नाम अब भी प्रचलन में हैं?

    हम उत्तर कैसे दें?

    क्या यह कहना पर्याप्त होगा—

    कि बातचीत चाँदी है, कविता सोना है,

    और स्त्रियाँ इन दोनों धातुओं की गूँज हैं

    और अब से कविता ही हमारी भाषा होगी?

    साथी चरवाहो,

    आओ अपने लबालब भरे कटोरों में हाथ डालें

    आओ, अपने गान आरंभ करें।

    स्रोत :
    • रचनाकार : अमजद नासिर
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए शायक आलोक द्वारा चयनित

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