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एक अतिरिक्त छुवन‌

ek atirikt chhuvan‌

एक छुवन वह

जो तुमने अपनी रखी थी मेरे कंधे पर

एक वह जो तुम्हारे हाथ हटाने के बाद

अब तक छू रही मुझे

एक डर में भीगी हुई ख़ुशी

आशँकाओं के झोंकों से सिकुड़ती

पर यह कँपकपी

भीतर मन में दबा लूँगा

ताकि तुम्हारे हाथों से छनकर आई सिहरन

छेड़े कोई तार, जिससे—

सामने, दृश्य में डूबी, तुम

विलग ‌हो जाओ, अपने आनंद‌ से

वह छुवन, वह प्रेमिल वज्रपात

सह लूँगा मैं फिर से

वह छुवन

जो तुम्हारे पहले मैसेज पर थमी थी

की—पैड के अक्षरों पर धड़कती

वह, जो बहुप्रतीक्षित कॉलबैक

को उठाने पर छू गई थी

कितनी संभावनाओं को

वह छुवन

जो ख़्याल में जाने से पहले

और वहाँ से निकलने के बाद भी है

वह अतिरिक्त छुअन

जो तुम्हारी अनगिनत छुवन की

स्मृति में ताज़ा है,

एक अतिरिक्त।

स्रोत :
  • रचनाकार : केतन यादव
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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