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एक ऐसी दुनिया

ek aisi duniya

पूजा कुमारी

पूजा कुमारी

एक ऐसी दुनिया

पूजा कुमारी

और अधिकपूजा कुमारी

    अनुग्रह से नहीं मिटती मन की खरोंचें

    यातनागृह में बहे आँसुओ का मूल्य

    एक्वेरियम की मछलियाँ जानती हैं

    दुनिया की दृष्टि उनके चमकीले पंखों से नहीं हटती

    दुःख आप ही सहना पड़ता है

    सब शोक में रोते नहीं कुछ अट्टहास भी करते हैं

    दुखों की बहती नदी देखकर

    शापित स्मृतियों की गीली गठरी का भार मुर्चाए

    हँसिया की तरह रेतता है

    धीरे-धीरे अदेखे सपनों का गला

    दरक रहा प्रत्याशाओं का पहाड़

    मैं जन्मना अपराधी हूँ

    अपराध इतना कि साँस ले रही हूँ अपनी मर्ज़ी से

    और कहती हूँ एक दिन बदल जाएगा सब कुछ

    अँधेरे के गर्भ से ही निकलेगा रास्ता

    पहाड़ का सीना चीरकर नदी अपनी लय में बहेगी

    तमाम यात्राओं की स्मृतियाँ और मधुर स्वप्न से घिरी हुई

    मैं चाहती हूँ अपनी ज़मीन जहाँ बो सकूँ करूणा के बीज

    उगा सकूँ मनचाहे सपने जहाँ भय की हवा बहती हो

    गाती हो चिड़िया अपने हिस्से का सच

    पेड़ कह सके कटने का दर्द

    कुल्हाड़ी बता सके क्रूर सभ्यता का रंग

    एक ऐसी दुनिया जिसमें सिर्फ़ प्रेम करने वाले ही रह सकें

    घृणा का पता जानने वालों का प्रवेश हो वर्जित।

    स्रोत :
    • रचनाकार : पूजा कुमारी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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