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दिल में घुपी तलवार

dil mein ghupi talvar

अनुवाद : देवेश पथ सारिया

म्याओ-यी तू

म्याओ-यी तू

दिल में घुपी तलवार

म्याओ-यी तू

और अधिकम्याओ-यी तू

    कृपया मेरे दिल से यह तलवार निकाल दो

    यह बहुत गहरी घुपी हुई है

    इतनी कि बाहर किसी को दिखाई नहीं देता ख़ून

    वहाँ किसी झील की सतह जैसी शांति है

    और वह लड़की जिसकी परछाईं दिखाई देती है

    झील के पास प्रार्थना करती हुई

    कौन उसके बोझिल अतीत पर रहम करेगा

    जून के किसी दिन

    कहीं से आई थी तलवार

    आँसू ताँबे और लोहे की दीवार पिघला सकते हैं

    लेकिन इस छोटी मूठ की तलवार को नहीं मिटा सकते

    तलवार की धार मेरी वेदना से कुछ कुंद हुई है

    मैं पूछना चाहती हूँ तुमसे

    क्या तलवार थामा तुम्हारा हाथ

    एक बार भी काँपा था,

    ज़रा-सा ही सही?

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : म्याओ-यी तू

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