Font by Mehr Nastaliq Web

धरहरिया

dharahariya

प्रकाश उदय

प्रकाश उदय

धरहरिया

प्रकाश उदय

और अधिकप्रकाश उदय

    हउ देखऽ, धइलस माचिस में कइ लेलस बन्द अगिनदेव के॥ देखऽ

    कि छँउकल धइ लेलस चान॥ धइले बा अँगुरी के टिपला में बिजुरी

    के सब-सब टिपवान॥ कि जवना के धुन धइलस धइ लेलस धउरा के॥

    जूता धरवा लेलस चउकठ के बहरा मन्दिर में धइलस भगवान॥

    हइ देखऽ, धइ लेले धवकल, नापत में आपन जब टोपरा बिगहिया,

    धरिछना के तीन धूर धरती, धइलस धरिछना जरीब॥ धइलस धरिछना

    जरीब, हूरा के पँजरी में, पटकन के पीठ प, मुकवसला-लतवसला के

    जहाँ-तहाँ धइलस गरीब...॥

    देखऽ कि केहू ना धइल धवकल के बाँह, केहू ना कइल

    धरहरिया!!

    केहू ना धइल धवकल के बाँह दाँते से धइलस धरिछना॥

    पाछे से धइलस फरिछना॥ आगे से धइलस धवकल के लटकन,

    धरिछना के भउजी, लटक गइलस बिहुनी॥

    हइ देखऽ... हइ देखऽ...दाँते धराइल बा तीन धूर धरती॥ तीन

    धूर धरती पिछवड़िए धराइल बा॥ तीन धूर धरती धइ लटकल बिया हइ

    धरिछना के भउजी॥...का चाहीं अउरी!!

    अब सब धरहरिया में धउरी॥ धउरी धउरी, ना धउरी नउजी॥ धउरो,

    धरो जाके चान॥ तीन धूर धरती हमार॥

    धूर-धूर धरती हमार॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : अरज-निहोरा (पृष्ठ 42)
    • रचनाकार : प्रकाश उदय
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY