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धमाका

dhamaka

शीह पी-शु

शीह पी-शु

धमाका

शीह पी-शु

और अधिकशीह पी-शु

    ज़मीन के नीचे छुपी हुई गैस

    जंग द्वारा दमन का सामना नहीं कर पाई

    वह चाहती थी बाहर आना

    लेकिन कोई रास्ता था

    वह ज़मीन के नीचे थी

    वह किसी को दिखाई दी

    सतह की हलचल में खो गई

    इस तरह हुआ

    धमाका धमाका धमाका

    धमाका हमारी समस्याओं में

    धमाका हमारे सत्यों में

    धमाका हमारे आलस में

    धमाका मनुष्यों के जीवन में

    धमाके में तहस-नहस हो गए घर

    हमारी निस्पृहता में धमाका

    लपटें आकाश के अंधकार में

    छेद किए डालती हैं।

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : शीह पी-शु

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