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देखीं अबकी बे का होला

dekhin abki be ka hola

प्रकाश उदय

प्रकाश उदय

देखीं अबकी बे का होला

प्रकाश उदय

और अधिकप्रकाश उदय

    चलल चुनावी चर्चा चहुँदिसि—

    चढ़ल चंग पर चोला

    देखीं, अबकी बे का होला

    देखीं-देखीं, अबकी बे का होला

    ऊहे रही कि ऊहो जाई

    के खोरी के खाई

    अबकी कवन चोर चउमाथा—

    चढ़ के बिरहा गाई

    केकरा मन माहुर के मोरी—

    मय मुँह से मिठबोला

    देखीं, अबकी बे का होला

    आपन-आपन धरम धरीं जा

    आपन-आपन जतिया

    छोड़ीं छाव कबो—

    बिसारीं पँचबरिसा दुरगतिया

    अपना आँठी के अलमोला—

    अवसि-अवसि अनमोला

    देखीं, अबकी बे का होला

    ऐरू-गैरू-नत्थू-खैरू

    लेंढ़ा-ढोंढ़ा-मंगरू

    अखनी सब बाबू-भइया, जे—

    सब दिन बलि के बछरू

    ईहे मोका बा बोका जी

    रउरो ठाँसी छोला

    देखीं, अबकी बे का होला

    एने देश रसातल, ओने—

    भारी भासन भोंभा

    बाटुर भोट बटोरीं, चाभीं—

    रजगद्दी मलगोभा

    हे हाथे लुचुई लोगिन

    हो हाथे हजमोला

    देखीं, अबकी बे का होला

    जहँवे चहले तहें मुँतवले

    अब कलकल ककुलावे अइले

    एक्के थइला से छितरा के

    ऊहे मुँह महकावे अइले

    अँइसे जानल—

    हर फर जितबे बमगोला

    देखीं, अबकी बे का होला

    देखीं-देखीं, अबकी बे का होला...

    स्रोत :
    • पुस्तक : अरज-निहोरा (पृष्ठ 85)
    • रचनाकार : प्रकाश उदय
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2020

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