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दसा-दुरदसा

dasa duradsa

आशाराम ‘जागरथ’

आशाराम ‘जागरथ’

दसा-दुरदसा

आशाराम ‘जागरथ’

और अधिकआशाराम ‘जागरथ’

    जहँ जाति बसै हर जाती मा

    जाती के बोली बाती मा

    जाने अनजाने कारन मा

    यक दूजे के व्यहारन म़ा

    जहाँ बसै हिकारत भेदभाव

    कनखी नजरन मा आँखी मा

    भुखमरी गरीबी बाढ़ै कहुँ

    केउ खाय खाब खैराती मा

    हउ गाँव कबहुँ बिसरत नाहीं

    जहँ लोटेन धुरी-माटी मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    जाती कै बसइया अगल-बगल

    इक दूजे जात कै काम अलग

    देखन मइहाँ समकूल गाँव

    मुल भित्तर-भित्तर अलग-थलग

    केव ऊँच रहै केव नीच रहै

    केउ ऊँच-नीच के बीच रहै

    केउ सबके बीचे पूजनीय

    केउ सबसे नीच अछूत रहै

    मरनी-करनी सादी-ब्याहे

    इक कौम जात-पंचइती मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    नजर-नजर मा बसै हिकारत

    ‘पहिया’ भेदभाव कै भारत

    पइदा करैं जाति मेहरारू

    मरद बैमनस इरखा स्वारथ

    उप्पर से देखे सद्भाव

    अन्दर पैठ बनावै घाव

    बसै गाँव मा जाति-समूह

    सबमा छूत-छात कै भाव

    काम आवैं गइर बिरादर

    सादी अऊर बियाहे मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    ईसा पीर मूसा पीर

    सबसे बड़का पइसा पीर

    कोखि’क् पीरा सहिउ लियै मुल

    सहि ना जाइ भूख कै पीर

    एड़ी-एड़ी फटै बेवाई

    जाति-जाति परपीर पराई

    पीर पिराय पीर के पीरा

    पीर हि जानैं पीर पराई

    पीर पीर से मिलै देय ना

    पीर जाति-धन-दौलत मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी' मा

    बाभन-ठाकुर कै धाक रहै

    मेहनत कै काम हराम रहै

    हर कै मुठिया जो पकरि लियैं

    तौ पूरे गाँव मजाक उड़य

    खेलैं-कूदैं मन-मउज करैं

    चुरकी पै मान-गुमान करैं

    दुसरे कै हींसा खाय-खाय

    संडान केऊ उधिरान रहैं

    कुछ रहैं अकेलै दीन-हीन

    बस चन्नन टीका माथे मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    बढ़ई धोबी नाऊ लोहार

    गाँव भरेन कै सेवादार

    लेहना अउर तिहाई बदले

    काम करैं वै सालोंसाल

    बस बिगहा दुइ बिगहा खेत

    अधिया जोत बटइया खेत

    भूमिहीन बहु सूद-चमार

    बभनन के तौ खेतवै खेत

    तेली -तमोली अहिर कहार

    करैं गुजारा जाती मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    जेतना मइहाँ जे जहाँ रहै

    वतनय मा परेसान रहै

    केव कहै बिना घिउ खाबै ना

    केहू घर नोन तेल रहै

    पाहीमाफी खुसहाल तबौ

    हँसि-हँसि बतियायँ मजाक करैं

    खाबे-कपड़ा आगे कउनौ

    लोगै ना सोच-विचार करैं

    भगवान भरोसे जियत रहे

    कोसैं सब अपने किस्मत कां

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    धोबी पासी कोरी चमार

    वनहूँ करैं जाति कै मान

    यकदूजे से छूत मनावैं

    अपुआँ दीयैं ऊँच मचान

    अधोगति चुप्पी चुपचाप

    भित्तर-भित्तर बहुत निरास

    फूटै ना बोली मुँह बाहेर

    सीरदार कै केतनौ खास

    हीनभावना तुनकमिज़ाजी

    तिल-तिल बाढ़ै गुरबत मा

    यकतनहा नीम कै पेड़ गवाह

    बचा बा पाहीमाफी मा

    स्रोत :
    • पुस्तक : पाहीमाफी (पृष्ठ 47)
    • रचनाकार : आशाराम ‘जागरथ’
    • प्रकाशन : रश्मि प्रकाशन, लखनऊ
    • संस्करण : 2021

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