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राम कहा रमकल्ली के माई

raam kaha ramkalli ke mai

मोहनलाल यादव

मोहनलाल यादव

राम कहा रमकल्ली के माई

मोहनलाल यादव

और अधिकमोहनलाल यादव

    राम कहा रमकल्ली के माई

    आवा मिलि के किरतन गाई।

    जिनगी बिपत पहाड़ होइ गइल

    नाव बीच मजधार होइ गइल,

    अपने बगिया में पतझड़ बा

    ओनकर मौज बहार होइ गइल।

    दुख के दिनवाँ कबले जाई

    राम कहा रमकल्ली के माई।

    घर में बाटै चूल्हा ठंडा

    ना आलू बा नाहीं बंडा,

    चाउर दाल खतम भा आटा

    नाहीं बचा बा काना भाँटा!

    आवा मिलि के हवा बुकाई

    राम कहा रमकल्ली के माई।

    जबसे फइला अहै कोरोना

    रोजी अउर रोजगार कतौं ना,

    गाँव-सहर में एकै रोना

    हाय कोरोना! हाय कोरोना!

    बबवा खोजेस नई दवाई

    राम कहा रमकल्ली के माई!

    जनगण मन अधिनायक गावा

    मड़ही पे झंडा फहरावा,

    गाँधी, भगत, सुभाष दिलाए

    आजादी के जसन मनावा।

    मातृभूमि पे मरि मिटि जाई

    राम कहा रमकल्ली के माई।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 45)
    • रचनाकार : मोहनलाल यादव
    • प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2023

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