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छूटी चप्पल

chhuti chappal

ऐश्वर्या तिवारी

ऐश्वर्या तिवारी

छूटी चप्पल

ऐश्वर्या तिवारी

और अधिकऐश्वर्या तिवारी

    जैसे तेज़ चलती माँ के पल्लू थामे

    जब चलता है बच्चा

    और छूट जाती है उसके एक पैर की चप्पल पीछे

    जिसे पहनने को वो खींचता है माँ का पल्लू वापस

    ठीक वैसी ही है वो

    रफ़्तार से भागती दुनिया में

    अपनी अदाओं और आदतों की एक चप्पल पीछे छोड़

    वो खींचना चाहती है इसे वापस।

    वो क़लम दवात पर लौट जाना चाहती है

    वो चाहती है देश में निकले डाकिए की बहाली

    उसे भेजनी हैं हजारों चिठ्ठियाँ

    उसे अभी भी पसंद है इंतज़ार का कसैला स्वाद

    वो चाहती है दुनिया जब थके तो लौट आए कविता पर

    मंचों पर खेले जाए बहुत से नाटक

    बहुत शोर में वो हो जाती है ग़ुलाम अली साहब की गाई ग़ज़ल-सी

    खेलने का उसे कोई शौक नहीं चोर-पुलिस

    मगर बातों-बातों में पकड़ लेती है वो चोर मन का

    और ख़ामोशी का कान ऐंठते हुए कहती है—

    क्यों रे! कहाँ छुप रहा था बातों के पीछे?

    दुनिया देखना!

    ज़रा संभल कर!

    एक दिन अचानक पल्लू खींचकर

    ले आएगी वो तुम्हें पीछे

    खेलते हुए एक टाँग पर लंगड़ी

    और पहनेगी अपनी छूटी चप्पल।

    स्रोत :
    • रचनाकार : ऐश्वर्या तिवारी
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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