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चौमासा

chaumasa

मोहनलाल यादव

और अधिकमोहनलाल यादव

    घटा सुरजू के ताप मिटि गयो संताप, पिया आइग अषाढ़ के महिनवाँ ना।

    घेरे घटा घनघोर दादुर करइ लागे सोर, झकझोर बहे पुरवा पवनवाँ ना।

    टूटि गयो मेड़ डाँड़ ताल पोखरा में बाढ़, सब बूड़ि गयो खेतबा सिवनवाँ ना।

    बादल गरजे अकास होवे परलै अभास, काँपि काँपि जाए हमरा परनवाँ ना।

    आई सावनी बहार पड़े रिमझिम फुहार, डार निमियाँ के पड़िग झुलनवाँ ना।

    करे सोलहौ सिंगार आँखी कजरा कटार, सखी गोड़वा में सोहेला रंगनवाँ ना।

    झूमि झूमि नाचे गाए गीत कजरी सुनाए, चुभि जाए सुनि हियरा में बनवाँ ना।

    पड़े बरखा के बून जरि जाए मोरा खून, सून पिया बिन हमरा भवनवाँ ना।

    भादों रैन अन्हियारी झींगुर करै झनकारी, बान सोनवाँ के जइसे बिजुरिया ना।

    मेघा गावेला मल्हार लागे जियरा कटार, नाचि नाचि मोर करे किलकरिया ना।

    मघा बरसे ठठाइ गई धरती अघाइ, झुकि झुकि लुकि बरसे बदरिया ना।

    एक हमही अभागी लागी बिरह की आगी, पिया सून किए हमरी सेजरिया ना

    मास लगिग कुवार चीकन डेहरी दुआर, नित निहार रही तोहरी डगरिया ना।

    बून बरसे सेवाती फरै सोनवाँ के पाती, लहराइ रही धनवाँ के बलिया ना।

    करे हथिया चकोर होइ गवा मन थोर, लहालोट भई हमरी फसलिया ना।

    फूलि गए वनकासा नाहीं बरखा के आसा, चौमासा बीता जाए बिन साँवरिया ना।

    स्रोत :
    • पुस्तक : अलगौझी (पृष्ठ 31)
    • रचनाकार : मोहनलाल यादव
    • प्रकाशन : हंस प्रकाशन, नई दिल्ली
    • संस्करण : 2023

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