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भिंचा हुआ जबड़ा

bhincha hua jabDa

पल्लवी जयराम

पल्लवी जयराम

भिंचा हुआ जबड़ा

पल्लवी जयराम

और अधिकपल्लवी जयराम

    तुम, हो सके तो समझना

    सबसे पहले उसका पक्ष

    जिस पर, नैतिकता ने हमला करके

    उसके अधिकार का हरण कर लिया हो।

    तुम्हें ख़ून चूसने वालों के

    दांतों से अधिक चुभना चाहिए

    उनका भिंचा हुआ जबड़ा,

    जो छटपटा रहे असहाय पर

    अधिक पकड़ बनाना चाहता है।

    तुम जब स्त्रियोचित जीवन बताने वाले

    उपदेशकों को सुन रहे हो

    तब नहीं भूलना

    बलात्कारियों के विचार

    जो एक तरह से मॉरल-पुलिस होने का

    दावा कर रहे थे।

    तुम गौर करने पर

    सुधारकों और आतातायियों

    में बहुत अंतर नहीं पाओगे

    क्योंकि दोनों के पास है;

    सत्य।

    सत्य जिनके पास होता है

    वो धर्म से अधिक

    हिंसा की औलादें हैं।

    यदि तुम सच में निकले हो

    जानने को कुछ ऐसा

    जो तुममें थोड़ी और समझ ला दे

    तो त्याग देना तुम्हारी

    सड़ी हुई अंतरात्मा

    क्योंकि यह भी

    परंपरा से उपजी बुद्धि है।

    इसीलिए तुम्हारी अंतरात्मा से

    ज़्यादा घातक कुछ नहीं।

    स्रोत :
    • रचनाकार : पल्लवी जयराम
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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